एमपी में रीवा जिले के हनुमना के रहने वाले शशि मोहन गुप्ता उन कुछेक लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए गोली खाई थी। गुप्ता को 1990 में पीठ में गोली लगी थी जब यूपी की तत्कालीन सरकार ने कारसेवकों पर गोलियां चला दी थीं। इसके बावजूद गुप्ता 1992 के उन कार सेवकों में भी शामिल थे जिन्होंने अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया था। उनके कुछ दोस्त इसमें घायल भी हुए थे। गुप्ता उमा भारती के नेतृत्व में राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बने थे। रक्षाबंधन पर नक्सली भाई का अनोखा तोहफा, सरेंडर कर 13 साल बाद बहन से बंधवाई राखीहालांकि, 1990 से कई साल पहले से ही वे इससे जुड़े हुए थे। सवा रुपैया दे दे भैया, रामशिला के नाम पर- नारे के साथ उन्होंने मंदिर आंदोलन में प्रवेश किया था जब अयोध्या में शिलापूजन के लिए देश भर से धन जुटाने का अभियान शुरू हुआ था। वे बताते हैं कि लंबे संघर्ष के बाद अंततः अयोध्या में अंततः मंदिर निर्माण हो रहा है। यह सभी देशवासियों के लिए खुशी का मौका है।
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